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पेटी कैश का इम्प्रेस्ट सिस्टम
इम्प्रेस्ट सिस्टम में पेटी कैश का गल्ला हर पीरियड उसी तय रकम से शुरू होता है, जिसे फ़्लोट या इम्प्रेस्ट कहते हैं। पीरियड के आखिर में आप ठीक उतना वापस डालते हैं जितना खर्च हुआ, ताकि गल्ला फिर से पूरा हो जाए।
यह कैसे चलता है
- फ़्लोट तय करें। ऐसी रकम चुनें जो करीब दो से चार हफ़्ते के छोटे खर्चों को पूरा करे, जैसे ₹10,000।
- इसे पेटी कैशियर को दें। मुख्य कैश बुक या बैंक में दिखता है कि पेटी कैश को ₹10,000 दिए गए।
- वाउचर पर खर्च करें। हर पेमेंट उसके बिल या वाउचर के साथ पेटी कैश बुक में लिखा जाता है।
- पीरियड के आखिर में फिर भरें। अकाउंटेंट वाउचर जाँचता है और ठीक उतनी रकम वापस देता है जितनी खर्च हुई।
- फिर से शुरू करें, पूरे फ़्लोट के साथ।
इस सिस्टम की खूबी वह जाँच है जो यह देता है: किसी भी समय गल्ले का कैश + खर्च हुए पैसे के वाउचर = फ़्लोट। अगर ये मेल न खाएँ तो कुछ गड़बड़ है, और आपको उसी दिन पता चल जाता है।
एक हल किया हुआ उदाहरण
एक ट्रेडिंग ऑफ़िस 1 Nov 2026 को ₹10,000 का फ़्लोट तय करता है। नवंबर में पेटी कैशियर ये पेमेंट करता है:
| अकाउंट हेड | खर्च |
|---|---|
| Travel and conveyance | ₹2,140 |
| Postage and courier | ₹1,260 |
| Tea and refreshments | ₹1,980 |
| Printing and stationery | ₹1,575 |
| Repairs and maintenance | ₹900 |
| Cleaning | ₹495 |
| टोटल | ₹8,350 |
30 Nov को बुक में क्लोज़िंग बैलेंस ₹10,000 − ₹8,350 = ₹1,650 दिखता है। कैशियर गल्ला गिनता है: ₹1,650। मेल खाता है।
अकाउंटेंट 41 वाउचर जाँचता है, हर हेड को उसके खर्च वाले अकाउंट में चढ़ाता है, और कैशियर को बैंक से ₹8,350 देता है। दिसंबर के लिए गल्ला फिर ₹10,000 का हो जाता है।
मेकर में: बंद की गई नवंबर की बुक पर अगले पीरियड के लिए कॉपी दबाएँ। दिसंबर की बुक ₹1,650 ओपनिंग कैश के साथ खुलती है। पहली एंट्री में भरी गई रकम लिखें: "Cash from bank to restore imprest", मिला ₹8,350। बैलेंस ₹10,000 दिखता है।
मुख्य किताबों में एंट्री
- जब फ़्लोट पहली बार बनता है: Petty cash डेबिट ₹10,000, Bank क्रेडिट ₹10,000।
- फिर से भरते समय: हर खर्च का हेड अपने टोटल से डेबिट (Travel ₹2,140, Courier ₹1,260 वगैरह), Bank क्रेडिट ₹8,350।
मुख्य किताबों में पेटी कैश अकाउंट हर समय ₹10,000 पर रहता है, जब तक आप फ़्लोट बदलने का फ़ैसला न करें।
फ़्लोट बदलना
अगर गल्ला हर दो हफ़्ते में खाली हो जाता है, तो फ़्लोट बढ़ाएँ, जैसे ₹15,000, भरते समय ₹5,000 एक्स्ट्रा देकर। अगर बहुत कैश बिना इस्तेमाल पड़ा रहता है, तो घटाएँ। गल्ले में ज़्यादा कैश लालच भी है और खतरा भी; सिर्फ़ उतना रखें जितना सच में चाहिए।
बिना तय फ़्लोट के
कुछ छोटी दुकानें जब भी गल्ला कम हो, कैशियर को गोल रकम में पैसा दे देती हैं। यह भी चलता है, पर ऊपर वाली झटपट जाँच नहीं रहती। अगर ऐसा करते हैं, तो दी गई हर रकम "मिला" वाली लाइन में लिखें, और हफ़्ते में कम से कम एक बार कैश को बुक के बैलेंस से गिनकर मिलाएँ।